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Monday, 15 August 2011

छत्‍तीसगढ़ी कविता

खेत -खार झूमर-झूमर नाचे , माते चिखला माटी
आगे बरसात संगी खेलव भौरा-बाटी
नरवा-नदिया म पूरा आगे , तरिया घलोक लबलबा गे
जम्मो कोती पानी-पानी गली खोर बोहागे
चुहे ला धरलिस घर-कुरिया सब चुचवागे वोरवाती
खेत-खार ..................

वैभव शिव पाण्‍डेय

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